ई-नगर पालिका, मध्य प्रदेश शासन

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निकाय के बारे में

नरसिंहपुर जिला मध्य प्रदेश के मध्य भाग में स्थित है और मध्य प्रदेश भारत के मध्य भाग में स्थित है।अक्षांश २२º.४५ उत्तर २३º.१५ उत्तर, देशांतर ७८º.३८ पूर्व ७९º.३८ पूर्व, क्षेत्र ५१२५.५५ वर्ग किलोमीटर, समुद्र तल से ऊपर ३५९. मीटर है। नरसिंहपुर जिला संभागीय मुख्यालाय जबलपुर से ९३ कि.मी.एवं प्रदेश मुख्यालय भोपाल से २६५ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। नरसिंहपुर जिला देश के दिल में स्थित होने के नाते एक विशेष महत्व रखती है। यह रूप में अच्छी तरह से स्थित होने की वजह से अपनी प्राकृतिक स्थिति का विशेष ध्यान आकर्षित करती है। उत्तरी पर विंध्याचल समाप्त होता है और लंबाई के माध्यम से बाहर दक्षिणी छोर पर पर्वत के सतपुड़ा पर्वतमाला हैं। उत्तरी भाग नदी में नर्मदा पूर्व से पश्चिम तक बहती है। नर्मदा नदी गंगा के रूप में पवित्र है।

नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर की स्थापना फिरंगी शासन के दौरान सन् १८६४ मे हुई थी और इस तरह वर्ष २०१५ तक नगर  पालिका १५१ वर्ष का इतिहास समेटे हुए है। वर्तमान मे नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर कुल २८ वार्डो मे विभक्त है एवं नगरीय निकाय का कुल क्षेत्रफल १४.०० वर्ग कि.मी. है। जनगड़ना वर्ष २०११ के अनुसार नगर की कुल जनसंख्या ५९९८७ है।

नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर में दिनांक १२.०१.२०१५ से अध्यक्ष श्रीमती अर्चना नीरज महाराज जी एवं दिनांक ३१.०७.२०१२ से मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री के.एस. ठाकुर जी कार्यरत है।

नगर में कुल ०६ पार्को (उद्यान) का निर्माण बच्चो एवं नागरिको की सुविधा एवं प्राकृतिक सौंदर्या को ध्यान में रखते हुए किया गया है। निकाय द्वारा जनसामान्य की सुविधा एवं स्वच्छता अनुरूप नगरीय क्षेत्रो में सार्वजनिक शौचालय १०, सुलभ शौचालय ०८ एवं २५ मूत्रालयो का निर्माण कराया गया है जिसके परिणाम स्वरूप नगर स्वच्छ है। नगर पालिका परिषद नरसिंहपुर द्वारा निम्न लिखित सन्सधनो / मशीनरी द्वारा नगरीय क्षेत्रो को स्वच्छ करने में उपयोग किया जा रहा है:-

क्र. संसाधन / मशीनरी नग / मात्रा
1. ट्रेक्टर 08
2. टेंकर 13
3. फायर टेंकर 01
4. वेक़यूम एक्टियर 01
5. फायर वाह्न 02
6. क़्विक रिस्पॉस व्हीकल 01
7. स्ट्रीट लाइट ऑटो 01
8. हाइड्रोलिक ट्रीपर ऑटो 01
9. छोटा हाथी 02
10. महिंद्रा जायलो 01
11. जेसीबी 01
12. ट्राली 04
13. ट्राला काउ क्रेचर 01
14.  शव वाह्न 01
15. साइकिल-रिक्शा, घर-२ कचरा इकट्ठा 30

परिषद के मुख्य कर्तव्य व कार्यो का विवरण नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 123 में विर्निदिष्ट है । जो निम्नानुसार है –

(क) सार्वजनिक पथों, स्थानों तथा भवनों को प्रकाशित करना|
(ख) सार्वजनिक पथो, स्थानों तथा मल-नालियों और ऐसे समस्त स्थानों को साफ करना जो प्राइवेट सम्पत्ति न हों और जो सार्वजनिक उपभोग के लिए खुले हों, भले ही ऐसे स्थान परिषद् में निहित हों या न हों, हानिकारक घासपात को हटाना और समस्त सार्वजनिक न्यूसेंस का उपशमन करना|
(ग) विष्ठा तथा कूड़ा करकट का व्ययन करना और विष्ठा तथा कूड़ा करकट से कम्पोस्ट खाद तैयार करना|
(घ) आग बुझाना और आग लग जाने की दषा में जीवन एवं सम्पत्ति की रक्षा करना
(ड़) घृणोत्पादक या खतरनाक व्यापारों या व्यवसायों का विनियम या उपषमन करना|
(च) सार्वजनिक पथों या स्थानों में से तथा ऐसे स्थलों में से, जो प्राइवेट सम्पत्ति न हों, और जो सर्वसाधारण के उपभोग के लिए खुले हों, भले ही ऐसे स्थल परिषद, में निहित हों या राज्य सरकार में निहित हों, बाधाओं तथा प्रक्षेपित भागों को हटाना|
(छ) मृतकों की अन्त्येष्टि के लिए स्थान अर्जित करना, उनका अनुरक्षण करना, उनमें तब्दीली तथा उनका विनियमन करना|
(ज) महामारी या अन्य अकल्पित आपात-स्थिति में मृतकों की अन्त्येष्टि के लिऐ ऐसे विषेष उपाय करना जो विहित प्राधिकारी द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन इस सम्बंध में निदेष देने के लिए सशक्त किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित किए जाएं|
(झ) खतरनाक भवनों या स्थानों को सुरक्षित बनाना या हटाना तथा अस्वाथ्यकर परिक्षेत्रों का पुनरूद्धार करना|
(ज) सार्वजनिक पथो, पुलियो, नगर पालिका के सीमा – चिन्हों, मण्डियों, हाटों, वधशालाओं, शौचालयों, संडासों, मूत्रालयों, नालियों, मल-नालियों, जल निकास-संकर्मो, मलनाली से संबंधित संकर्मो, स्नानगृहों, धुलाई के स्थानों, पीने के पानी के नलों, तालाबो, कुओं, बांधो तथा 8 उसी प्रकार के अन्य संकर्मो का निर्माण करना, उनमें परिवर्तन करना और उनका अनुरक्षण करना|
(ट) कांजी हाउसो की स्थापना करना तथा उनका प्रबंध करना और जहाॅ पषु अतिचार अधिनियम 1871, 1871 का सं (1) प्रवर्तन में हो वहां उस अधिनियम की धारा 4, 5, 6, 7, 12, 14, 17 तथा 19 के अधीन राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट के समस्त कृत्य करना|
(ठ) जल के वर्तमान प्रदाय के अपर्याप्त तथा अस्वास्थ्यकर होने के कारण निवासियों तथा घरेलू पशुओं के स्वास्थ्य को खतरे से बचाने के लिए उचित तथा पर्याप्त जल प्रदाय या अतिरिक्त जलप्रदाय को जब तक ऐसा प्रदाय या अतिरिक्त प्रदाय युक्तियुक्त खर्च से प्राप्त किया जा सकता हो, प्राप्त करना और ऐसे जल का नियतकालिक रूप से सूक्ष्म परीक्षण करना|
(ड) पथों तथा उद्यानों का नामकरण करना तथा मकानों को संख्याकित करना|